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बर्फ वाले ग्रीनलैंड में दो मिलिट्री बेस बनाएगा अमेरिका... ट्रंप ने डेनमार्क से की डील

By Dr,Ravi SharmaIndia24x7 Bureau
बर्फ वाले ग्रीनलैंड में दो मिलिट्री बेस बनाएगा अमेरिका... ट्रंप ने डेनमार्क से की डील

अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत ग्रीनलैंड के नरसारसुआक में पुराना यूएस बेस फिर शुरू होगा और मेस्टर्सविग में नया ठिकाना बनेगा. यह कदम ट्रंप के महीनों के दबाव के बाद सामने आया है, जबकि ग्रीनलैंड के ज्यादातर लोग अमेरिकी नियंत्रण के विचार को खारिज कर चुके हैं.

ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी, दो जगहों पर मिलिट्री बेस की योजना

अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच प्रस्तावित समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना सामने आई है। दक्षिणी ग्रीनलैंड के नरसार्सुआक और पूर्वी ग्रीनलैंड के मेस्टर्सविग में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर चर्चा है।

न्यूयॉर्क: अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की योजना है। प्रस्तावित समझौते में ग्रीनलैंड के दो रणनीतिक स्थानों पर अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का प्रावधान शामिल बताया जा रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समझौते पर स्थानीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम समय और समझौते की शर्तों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पक्षों की ओर से होने के बाद ही मानी जाएगी।

नरसार्सुआक में पुराने अमेरिकी बेस को फिर शुरू करने की योजना

प्रस्तावित योजना के तहत दक्षिणी ग्रीनलैंड के नरसार्सुआक (Narsarsuaq) में शीत युद्ध के दौर के पुराने अमेरिकी सैन्य अड्डे को दोबारा सक्रिय किए जाने की संभावना है। यह स्थान ग्रीनलैंड के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और अतीत में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है।

पुराने सैन्य ढांचे का पुनः उपयोग अमेरिका को क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि, बेस के संभावित इस्तेमाल, वहां तैनात किए जाने वाले सैन्य संसाधनों और इसकी परिचालन क्षमता को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

मेस्टर्सविग में दूसरा सैन्य ठिकाना

योजना में पूर्वी ग्रीनलैंड के मेस्टर्सविग (Mestersvig) में दूसरा अमेरिकी सैन्य ठिकाना स्थापित करने की संभावना भी बताई गई है। यह इलाका ग्रीनलैंड के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पूर्वी हिस्से में स्थित है।

मेस्टर्सविग में फिलहाल डेनमार्क की विशेष सैन्य इकाइयों की मौजूदगी बताई जाती है। ऐसे में यहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने की स्थिति में अमेरिका और डेनमार्क के बीच सैन्य सहयोग तथा आर्कटिक क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ावा मिल सकता है।

आर्कटिक में बढ़ रही रणनीतिक अहमियत

ग्रीनलैंड का भौगोलिक स्थान उसे आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र को अपनी रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा मानता रहा है।

ग्रीनलैंड में सैन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार आर्कटिक क्षेत्र में निगरानी, संचार, सैन्य लॉजिस्टिक्स और संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की अमेरिकी क्षमता को मजबूत कर सकता है।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड की भूमिका अहम

ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा है, जबकि उसे व्यापक स्वायत्तता प्राप्त है। इसलिए ग्रीनलैंड में किसी बड़े सैन्य ढांचे की स्थापना या अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में महत्वपूर्ण बदलाव के लिए अमेरिका के साथ-साथ डेनमार्क और ग्रीनलैंड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

प्रस्तावित समझौते से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज और विस्तृत शर्तें सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि दोनों स्थानों पर अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का स्वरूप क्या होगा और इसका संचालन किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

आर्कटिक में बदलता सामरिक समीकरण

ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की संभावित योजना ऐसे समय सामने आई है जब आर्कटिक क्षेत्र का सामरिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है। समुद्री मार्गों, प्राकृतिक संसाधनों और सुरक्षा हितों के कारण आर्कटिक में अमेरिका, रूस और अन्य देशों की रणनीतिक सक्रियता पर पूरी दुनिया की नजर है।

यदि प्रस्तावित योजना आगे बढ़ती है, तो नरसार्सुआक और मेस्टर्सविग में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का विस्तार आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और शक्ति संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

नोट: इस रिपोर्ट में प्रस्तावित समझौते और सैन्य ठिकानों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध विवरण के आधार पर दी गई है। अंतिम स्थिति संबंधित सरकारों की आधिकारिक घोषणा और समझौते के दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद स्पष्ट होगी।